राष्ट्रीय योगासन खेल महासंघ (NYSF) का उदय - राजनीतिक संरक्षण, नियमों का खुला उल्लंघन और योग के मूल स्वरूप पर संकट

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 विशेष विश्लेषणात्मक रिपोर्ट: राष्ट्रीय योगासन खेल महासंघ (NYSF) का उदय - राजनीतिक संरक्षण, नियमों का खुला उल्लंघन और योग के मूल स्वरूप पर संकट

प्रस्तावना:

भारत में योग को एक प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में स्थापित करने की दिशा में 'राष्ट्रीय योगासन खेल महासंघ' (National Yogasana Sports Federation - NYSF) का गठन किया गया था। लेकिन, इस महासंघ की नींव विवादों, राजनीतिक संरक्षण और नियमों की स्पष्ट अनदेखी पर टिकी है। इस जांच रिपोर्ट में हम उन कानूनी और ढांचागत खामियों का विश्लेषण करेंगे, जिन्होंने न केवल 'राष्ट्रीय खेल विकास संहिता 2011' (Sports Development Code 2011) की धज्जियां उड़ाईं, बल्कि योग्य और उच्च-शिक्षित योग पेशेवरों को हाशिये पर धकेल कर, योग के पारंपरिक स्वरूप को भी खतरे में डाल दिया है।


1. नियमों की अनदेखी: खेल विकास संहिता 2011 का सीधा उल्लंघन

31 जनवरी 2011 को पारित राष्ट्रीय खेल विकास संहिता 2011 किसी भी खेल महासंघ को राष्ट्रीय मान्यता देने के लिए स्पष्ट नियम तय करती है। NYSF के गठन और मान्यता के समय इन अहम कानूनी प्रावधानों को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया:

  • अस्तित्व की न्यूनतम अवधि (Annexure II, Clause 3.3, पृष्ठ 43): इस क्लॉज के अनुसार, मान्यता के लिए आवेदन करने से पहले महासंघ का कम से कम 3 वर्षों से सक्रिय अस्तित्व होना अनिवार्य है। राजनीतिक प्रभाव के चलते NYSF को इसके गठन के तुरंत बाद ही मान्यता दे दी गई, जो सीधे तौर पर इस नियम का उल्लंघन था।

  • राज्य स्तरीय संबद्धता (Clause 3.4): इस नियम के तहत, महासंघ की भारत के कम से कम 2/3 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में मान्यता प्राप्त संबद्ध इकाइयां होनी चाहिए। NYSF अपने शुरुआती दौर में इस मानदंड को पूरा करने में भी पूरी तरह विफल रहा।

2. सरकारी तंत्र का दुरुपयोग और भ्रामक प्रचार

आम जनता और एथलीटों का विश्वास जीतने के लिए NYSF ने एक 'निजी संस्था' को 'सरकारी निकाय' के रूप में पेश करने का एक सुनियोजित भ्रम पैदा किया।

  • सरकारी भवनों का उपयोग: निजी बैठकों और गतिविधियों के लिए सरकारी भवनों का इस्तेमाल किया गया ताकि संस्था का सरकारी रुतबा दिखे।

  • अधिकारियों की नियुक्ति: यह सबसे चौंकाने वाला तथ्य है कि एक कार्यरत सरकारी अधिकारी (निदेशक स्तर) को NYSF का प्रथम अध्यक्ष नियुक्त किया गया। इस पद का फायदा उठाकर महासंघ ने सरकारी समर्थन, फंड और प्रमोशन हासिल किए, जो कि हितों के टकराव (Conflict of Interest) का एक स्पष्ट मामला है।

  • NIS पटियाला के साथ गठजोड़: संस्था को वैध और प्रतिष्ठित दिखाने के लिए 'नेताजी सुभाष राष्ट्रीय खेल संस्थान' (NIS), पटियाला के साथ सहयोग किया गया, जिसने इस भ्रामक ढांचे को और मजबूती दी।

3. नाम बदलने का खेल, ट्रेडमार्क विवाद और कानूनी लड़ाई

NYSF और इसके वैश्विक संगठनों का इतिहास विवादों और भ्रामक री-ब्रांडिंग से भरा पड़ा है:

  • राष्ट्रीय स्तर का टकराव: NYSF का सीधा टकराव श्री अशोक अग्रवाल के नेतृत्व वाले 'योग फेडरेशन ऑफ इंडिया' (YFI) के साथ हुआ। YFI लंबे समय से खुद को योग के लिए राष्ट्रीय महासंघ होने का दावा करता रहा है, जिसके कारण यह मामला न्यायालय (Court Case) तक पहुंचा।

  • अंतरराष्ट्रीय विवाद (IYSF): NYSF की मूल संस्था को 'इंटरनेशनल योगासन स्पोर्ट्स फेडरेशन' कहा गया, लेकिन इसी से मिलता-जुलता International Yoga Sports Federation (IYSF) 2013 से स्विट्जरलैंड (लुसाने) के कानूनों के तहत एक गैर-लाभकारी संस्था के रूप में पहले से मौजूद था।

  • मध्य प्रदेश के WYSF के साथ विवाद: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भ्रम से बचने के लिए नाम बदलकर World Yogasana Sports Federation (WYSF) किया गया। लेकिन, यह नाम पहले से ही मध्य प्रदेश में पंजीकृत एक पुरानी संस्था के पास था (पंजीकृत पता: 31 भोई मोहल्ला, इंदौर, मध्य प्रदेश, 452007)

  • वर्तमान री-ब्रांडिंग: इन सभी विवादों से बचने के लिए, अब इस सिंडिकेट ने एक बार फिर नया चोला ओढ़ते हुए भारत के लिए 'योगासन भारत' (Yogasana Bharat) और वैश्विक स्तर के लिए 'वर्ल्ड योगासन' (World Yogasana) नाम रख लिया है।

4. योग विशेषज्ञों के साथ धोखा और आसनों का पतन

खेल के नाम पर जिन आसनों का चयन, विभाजन और उनकी विविधताएं (variations) तय की गई हैं, वे घोर चिंता का विषय हैं। आधुनिक खेल के चक्कर में पारंपरिक योग विज्ञान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

  • सिंडिकेट का कब्जा: क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (QCI) के 'योग प्रमाणन बोर्ड' (YCB) में बैठे कुछ चुनिंदा नेताओं ने ही इन महासंघों का निर्माण किया है। ये लोग दोनों तरफ से फायदा उठा रहे हैं।

  • शारीरिक शिक्षा शिक्षकों (PETs) का दबदबा: महासंघों में शारीरिक शिक्षा के शिक्षकों और गैर-योग पृष्ठभूमि के लोगों की भरमार हो गई है।

  • असली योग पेशेवरों की उपेक्षा: यूजीसी (UGC) से मान्यता प्राप्त योग में मास्टर डिग्री और पीएचडी धारक असली विशेषज्ञों को पूरी तरह किनारे कर दिया गया है। योग पेशेवरों में ठगे जाने की भारी भावना है।


5. 'द नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट, 2025' - क्या यह पुराने गुनाहों का बचाव है?

हाल ही में सरकार ने खेल विकास संहिता 2011 में बड़े बदलाव करते हुए The National Sports Governance Act, 2025 पेश किया है। आइए देखें कि कैसे यह नया कानून NYSF जैसी संस्थाओं को तकनीकी रूप से बचा सकता है:

प्रावधान2011 खेल संहिता (SDC 2011)नया खेल शासन अधिनियम 2025
1. न्यूनतम अस्तित्व अवधिAnnexure II, Clause 3.3: मान्यता के लिए 3 वर्ष का सक्रिय अस्तित्व अनिवार्य था।Section 8: कोई न्यूनतम अवधि निर्धारित नहीं। सीधे मान्यता का रास्ता साफ।
2. मान्यता प्राधिकरणखेल मंत्रालय (MYAS) मान्यता देता था।Section 5(1) & 8(1): अब 'राष्ट्रीय खेल बोर्ड' (NSB) मान्यता देगा।
3. कानूनी स्थितिसोसायटी पंजीकरण अधिनियम के तहत पंजीकृत सोसायटी होना अनिवार्य था।Section 8(3): सोसायटी, धारा 8 (नॉट-फॉर-प्रॉफिट) कंपनी, या ट्रस्ट (Indian Trusts Act 1882) भी मान्य।
4. नवीनीकरण अवधिवार्षिक मान्यता प्रणाली (बिना ग्रांट वालों के लिए स्थायी)।Section 8(4): स्वचालित वार्षिक प्रणाली खत्म। बोर्ड द्वारा तय समय-अंतराल पर 'समय-समय पर' नवीनीकरण।

विश्लेषण: यह नया अधिनियम वर्तमान और भविष्य के लिए इन महासंघों को कानूनी वैधता (Legal Shield) प्रदान कर सकता है। लेकिन, जिस समय NYSF का गठन हुआ था, उस समय 2011 का कानून लागू था। इसलिए, शुरुआत पूरी तरह से फर्जी और अवैध थी। सरकारी शक्तियों का दुरुपयोग करने और जनता को गुमराह करने के आरोप में अभी भी संबंधित राजनीतिक नेताओं, मंत्रालय के अधिकारियों और महासंघ के पदाधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकता है।


6. महासंघ के अस्तित्व और योग की गरिमा बचाने हेतु मुख्य सुझाव (Key Recommendations)

यदि योग को एक खेल के रूप में जीवित रखना है और इसकी पवित्रता बनाए रखनी है, तो निम्नलिखित आमूल-चूल बदलाव (Systemic Overhaul) नितांत आवश्यक हैं:

  1. नेतृत्व परिवर्तन और योग्यता निर्धारण: महासंघ की पूरी टीम को बदला जाना चाहिए। नियमों में तत्काल संशोधन (Amendment) हो कि गवर्निंग बॉडी और उच्च पदों पर केवल वे ही लोग बैठ सकें जिनके पास UGC से मान्यता प्राप्त योग में वैध डिग्री (B.Sc/M.Sc Yoga, Ph.D. in Yoga) हो।

  2. वैज्ञानिक और पारंपरिक संतुलन: खेल के नाम पर 'जिम्नास्टिक' को बढ़ावा देने के बजाय, प्रतियोगिताओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ पारंपरिक योग प्रथाओं को लागू किया जाए।

  3. जवाबदेही और कानूनी जांच: महासंघ के गठन के समय हुई अनियमितताओं की उच्च स्तरीय जांच हो। सरकारी पद का दुरुपयोग करने वाले अधिकारियों पर 'पावर एब्यूज' के तहत कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

  4. शारीरिक शिक्षकों (PETs) की भूमिका सीमित करना: योग एक विशिष्ट विज्ञान है। इसमें शारीरिक शिक्षा शिक्षकों की भूमिका केवल एथलेटिक फिटनेस तक सीमित होनी चाहिए, न कि योग के तकनीकी और दार्शनिक पहलुओं के मूल्यांकन में।

निष्कर्ष:

NYSF और इसके सहयोगी संगठनों की कहानी दिखाती है कि कैसे नियमों की कमियों और राजनीतिक साठगांठ का फायदा उठाकर किसी भी संस्था को खड़ा किया जा सकता है। नए कानून (2025 एक्ट) भले ही आज इनके बचाव का रास्ता खोल दें, लेकिन शुरुआत में की गई वैधानिक धोखाधड़ी इतिहास के पन्नों में दर्ज है। समय आ गया है कि देश के असली योग विद्वान एकजुट हों और योग के इस बाज़ारीकरण और अवैध कब्ज़े के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद करें।

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